हमारे जंगल खतम हो रहे हैं

हमारे जंगल खतम हो रहे हैं. हमलोगों ने अक्सर आपस में बातें की ही होंगी कि आजकल बारिश कम हो रही है, गर्मी कितनी बढ़ गयी है, मच्छर कितने ज्यादा हो गए हैं आदि आदि. पर वजह जानने की जरुरत हमने महसूस नहीं की. बारिश क्यों कम हो रही है ये हम सब जानते हैं – पेड़ कट रहे हैं, जंगल कम हो रहे हैं, सिकुड़ते ही जा रहे हैं. अच्छा, हमलोगों में से कितने लोगों ने इस साल जंगल का (या चलिए अपने गांव का ही) मशरूम – यानि उड खाया. मशरूम, हम जानते हैं कि जंगल की जमीन पर पेड़ों की पत्तियों के सड़ने से पैदा होती हैं. अब जब जंगल नहीं हैं, पेड़ नहीं हैं तो हमें मशरूम कैसे मिलेगा?

हमलोग अक्सर शिकायत करते हैं कि मच्छर बहुत ज्यादा हो गए हैं. ये भी कम पेड़ों की वजह से हो रहा है. हम लोग जानते हैं कि चमगादड़ मच्छर भी खाते हैं. मैंने कहीं पढ़ा था कि एक चमगादड़ एक घंटे में १००० मच्छर खा जाता है. लेकिन आपने गौर किया कि अब चमगादड़ बहुत कम नजर आ रहे हैं? चमगादड़ विशाल और पुराने पेड़ों जैसे पीपल या इमली के पेड़ों पर रहते हैं. छोटे चमगादड़ इन पेड़ों की कोटरों में रहते हैं. ये पुराने – विशाल पेड़ अब हमारे आस पास नहीं रहे, ये या तो गिर गए या काट दिए गए. इनकी जगह लेने वाले नए पेड़ों को हमने पहले ही काट दिया. अब चमगादड़ों की संख्या घट गयी. इन मच्छर खाने वाले चमगादड़ों की संख्या कम क्या हुई, मच्छरों की आबादी बढ़ गई.

पेड़ों के काटे जाने से बारिश कम हो रही है, जिसकी वजह से मेंढक भी कम हो रहे हैं. इस बार की बारिश में कितने लोगों ने मेंढक का टर्राना सुना है? मैंने तो अभी तक नहीं सुना. मेंढक के टेडपोल मच्छरों के लार्वे खाते हैं. टेडपोल नहीं होने की वजह से मच्छरों के लार्वे पनप कर मच्छर बन जा रहे हैं और हमारी मुसीबत बन रहे हैं.

हमारे लोग महुआ चुनने के लिए पत्तियां जला दिया करते हैं. पत्तियां जलाने भर से ही जंगल का संतुलन बिगड़ जाता है. इन्हीं गिरी हुई पत्तियों में हजारों तरह के कीट, सांप और मेंढक रहते हैं. छोटे पक्षी छोटी झाड़ियों में घोंसले बनाती हैं और उनमें अंडे देती हैं. पत्तियाँ जलाने से ये सारे के सारे जीव खतम हो जायेंगे.

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