केया आदेर

‘हो’ समुदाय में मान्यता है कि आत्मा मरती नहीं है| व्यक्ति के मरने पर आत्मा शरीर से अलग हो जाती है| शरीर को लोग दफना देते हैं या जला देते हैं| मृत शरीर को दफ़नाने या जलाने की परंपरा गाँव या परिवार के अनुसार होता है| शव को प्राय: घर के आंगन ही में जलाया जाता है|

हमारे “हो” समाज के विभिन्न परिवारों में सिर्फ जीवित व्यक्ति ही नहीं बल्कि विगत कालों में मरे हुए लोग भी इन परिवारों के सदस्य होते हैं। मानव अस्तित्व का ये सत्य हमारे हो समाज के लिये काफी महत्वपूर्ण है और हमारे समाज को सम्पूर्ण रूप से व्यक्त करता है। ‘हो’ समाज में उनके पूर्वज, दादा-परदादा सिर्फ मृत रूप में ही नहीं होते बल्कि उनको हम पोता-पोती के रूप में भी देखते व महसूस करते हैं। इसलिये भी बच्चों नामकरण दादा-परदादा के नाम पर किया जाता है।

इसके अलावा “हो” लोग विशवास करते हैं की पूर्वजों की आत्माऐं (‘रोवा’ अथवा ‘उम्बुल’) उनके साथ करते है और उनकी रक्षा करते हैं, इसलिये वे उनकी उपासना करते हैं। इस तरह ‘हो’ लोग बीते कल को आज से एक अर्थपूर्ण तरीके से जोड़ पाते है जो अन्य समाज में शायद ही नज़र आता है।

जिन लोगों की आत्मायें “आदिंग” में बुलाने लायक होती है मरने के बाद उन्हीं लोगों की पूजा होती है। परंतु क्रूर मौत के शिकार (जैसे दुर्घटना, किसी जानवर के द्वार काटे जाने से मौत, चेचक आदि) हुए पुरुष तथा बच्चे जनने के दौरान हुऐ औरत की मृत्यु तथा जात बाहर किये गये लोगों की मृत्यु होने पर, उनकी आत्माओं को नहीं बुलाया जाता है। इसके अलावा जिन लोगों की मृत्यु किसी अन्य स्थान पर हुई है और घर से दूर दफनायें गये हैं, उन्हें भी आदिंग में बुलाया जा सकता है बशर्ते कि आपको उनके कब्र का पता हो। उस कब्र से मिट्टी लाकर “चेलांग” से ढक कर उसके “आत्मा” के “केया अदेर” की प्रक्रिया की जाती है।

पूर्वजों की उपासना दो स्तरों पर होती है 1.ग्राम स्तर पर 2.पारिवारिक स्तर पर –
ग्राम स्तर पर जब सामुदायिक रूप से बलि या पूजा की जाती है तब सामुदाय के सभी मृत लोगों कि आत्माओं को आदिंग मे बुलाया जाता है। इस अवसर पर पिछले दो पीढ़ी के विभिन्न परिवारों के मुख्य मृत व्यक्ति के नाम उच्चारित करते हुये पूजा की जाती है। यद्धपि महिलाओं और बच्चों के नाम नहीं लिये जाते है परंतु उनकी भी पूजा की जाती है। कुछ पूजाओं में उल्लेखनीय मृत महिलाओं के नाम लिये जाते है। हालांकि दो पीढ़ी से पुराने लोगों के नाम नहीं लिये जाते हैं मगर जब तक किसी गाँव के “हो” लोगों की आस्था इस रीति-रिवाजों पर रहेगी तब तक “आदिंग” में पूर्वजों का वास रहेगा।

पारिवारिक स्तर पर यद्धपि परिवार के common पूर्वजों को एक “आदिंग” में बुलाया जाता है ,परंतु उनके उतराधिकारी कालांतर में अपने पूर्वजों के आत्माओं को अपने आदिंंग में बुलाते हैं । “हो” परिवारों में अपने “किली” के चार पीढ़िओं तक के नाम उच्चारित करके उनकी पूजा की जाती है और ये पूजा साधारणत: पैत्रिक पक्ष के पूर्वजों की ही होती है ।

हो” लोगों के लिये “आदिंग” मूल रूप से पारिवारिक भोजन पकाने का कमरा होता है। यहाँ मिट्टी के घड़े रखे होते हैं और परिवार का खाना इसी में बनता है ।

एक ही पूर्वजों के उतराधिकारी जो पीढ़ी दर पीढ़ी वर्तमान स्थिति में पहुँचे हैं एक दूसरे को “मियड मॉण्डी चाटु रेन को ” कहते हैं । इससे सम्बन्धित लोग एक दूसरे के आदिंग में जा सकते हैं और एक दूसरे के “माण्डी चाटु” को छु सकते हैं। अगर किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो सभी परिवार, खाना बनाने वाले घड़े को फेंक देते हैं या उसमें खाना पकाना बन्द कर देते हैं। इसलिये इस रिस्तेदारी को “मियड मॉण्डी चाटु रेन को” कहा जाता है। इसी वजह से पारिवारिक स्तर पर “मियड मॉण्डी चाटु रेन को” के सभी मृत पूर्वजों को (पिछली चार पीढ़ी के) याद किया जाता है। इसमें चाचा और चचेरे भाई के रिस्ते के लोगों के भी नाम शामिल होते हैं।

“हो” लोग अपने पूर्वजों के लिये “हाम हो को” (बुजुर्ग लोग) “दुम हो को” (सोये हुये लोग) शब्दों का प्रयोग करते हैं। उनको “बोंगा” (भूत) की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। वे उन्हें अदृश्य रूप में परिवार के सदस्य के रूप में मानते हैं।

अदृश्य आत्माओं की इस दुनिया में परिवार के सभी मृत पूर्वज एक दूसरे से करीब से जुड़े होते हैं जो शाँतिपूर्ण खानदानी एकता को परिलक्षित करती है । ये भी माना जाता है कि उनलोगों की आसान पहुँच “सिंगबोंगा” और “बोंगा” तक होती है और इस तरह उनमें सर्वोच्च शक्तियों से सम्पर्क करने की ताकत होती है और वे अपने उतराधिकारियों को “सिंगबोंगा” से सम्पर्क करा कर उनकी मदद करते है।

इस तरह यह माना जा सकता है कि ‘हो’ समाज के परिवार का रसोईघर एक मंदिर के समान होता है| इस कक्ष में जूता या चप्पल पहनकर जाने की मनाही होती है| इतना ही नहीं दूसरे परिवार के या किसी दूसरे समुदाय के लोगों का प्रवेश भी यहाँ वर्जित होता है| इस कमरे को पवित्र रखा जाता है जिससे परिवार सुरक्षित रहता है|

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