आदर-सत्कार

‘हो’ समाज में अतिथियों के प्रति बहुत सम्मान की भावना होती है. वे अतिथियों का भावुकता एवं गर्मजोशी से आदर-सम्मान करते है.

इसी तरह से ‘हो’ समाज में बड़ों के प्रति भी सम्मान की भावना होती है. मान सम्मान व्यक्त करने का इनके समाज में कुछ नियम हैं, जिनका प्रयोग ये दृढ़ता से करते हैं.

१) किसी मेहमान के घर आने पर गर्मजोशी के साथ स्वागत करते हैं तथा उन्हें कुर्सी या खाट पर बैठाते हैं.
२) तब घर की महिला/लड़की लोटे में पानी लेकर दोनों हाथों से जोहार करते हुए मुँह-हाथ धोने का पानी देती हैं.
३)  किसी आदरणीय बुजुर्ग व्यक्ति के आने पर महिलायें ही पाँव धुला देती हैं.
४)  पैर इत्यादि धो लेने ले पश्चात उनके बैठने पर घर के सारे लोग सम्बन्धों के अनुरूप बारी-बारी से उन्हें प्रणाम (जोहार) करते हैं.
५)  अगर मेहमान पुरुष है तब साल के सूखे पत्ते में लिपटा तम्बाकू सम्मानपूर्वक दिया जाता है. मेहमान नहीं भी पीता हो तो भी इसे प्रेमपूर्वक ग्रहण करता है. इसे लेने-देने के समय भी वे एक-दूसरे का अभिवादन (जोहार) करते हैं.
६)  किमिन (बहू) को जेठ से सटने, समीप आने तथा एक दूसरे के कपड़े छूने की मनाही होती है. इसलिए किमिन के द्वारा पानी देने में अति सावधानी बरती जाती है. किमिन जेठ का नाम नहीं लेती और दादा के रूप में ही सम्बोधित करती है. यह नाम कहीं चर्चा परिचर्चा में भी लेना सामाजिक मनाही होती है. इस तरह किमिन अपने जेठ को सामाजिक रूप से मान-सम्मान देती है.
७) इसी तरह पत्नी की बड़ी बहनों की छाया से भी पति को दूर रहना पड़ता है. आपस में मिलने पर दूरी रखते हुए वे एक दूसरे को जोहार करते हैं. इस प्रकार किमिन (छोटे भाई की पत्नी), आजि हनर (पत्नी की बड़ी बहन), बाउ होंयर (पति के बड़े भाई) आदि के व्यवहारों में एक सीमा संबंध निश्चित है.

इसमें किसी प्रकार की गलती होने पर एक दूसरे के मान-सम्मान पर आंच आता है और गलती करने वाले को सामाजिक दण्ड का भागी होना पड़ता है.

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