भाषा

‘हो’ जनजाति झारखंड राज्य की प्रमुख जनजातियों में से एक है. ‘हो’ भाषा आष्ट्रिक भाषा परिवार की भाषा है. ‘हो’ भाषा मुण्डा भाषा की ही एक शाखा है. मुण्डा भाषा से निकली संताली, हो, भूमिज एवं खड़िया भाषा है.

भारत में बोली जानी आस्ट्रिक भाषाएँ आस्ट्रो एशियाटिक और भारत से परे पायी जाने वाली आस्ट्रिक आस्ट्रोनोशियन भाषा समूह में आती है. जिस तरह मानव समुदाय को चार प्रमुख शाखाओं या प्रजाति कौसासोएड, मोंगोलोयेड, आस्ट्रोलोएड और निग्रोलोएड में बांटा जा सकता है. ठीक इसी तरह भाषा परिवार को भी चार भागों में बांटा जा सकता है.जैसे- इंडोनेशियन, द्रविड़ियन, ऑस्ट्रोएशियाटिक तथा सिने तिबेतन में परिसीमित किया गया है. हो भाषा मुण्डा परिवार की भाषा तो है ही जो भारत की सबसे प्राचीनतम भाषा है.

भाषा समाज एवं उनकी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही पैतृक संपत्ति के सामान है, संस्कृति की तरह रूढ़ी है जो कालक्रम से समाज की क्षमता और सजीवता का प्रतीक होता है.

‘हो’ समाज का मुख्यत: झारखंड राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिले में मुख्य आबादी है. इसके अतिरिक्त ‘हो’ जनजाति के लोग ओडिसा, असम, पश्चिमी बंगाल, बिहार एवं आदि क्षेत्रों में मिलते हैं. प्राचीन काल में हो भाषा भारत देश के अतिरिक्त पूर्वी द्वीप समूह इंडोनेशिया, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो, आयरलैंड, मलेशिया, पोलिनेशिया, मौरिशस एवं अमेरिका आदि जैसे विकासशील एवं विकसित देशों में भी फैली हुई थी.

हो भाषा में प्राय: अल्पप्राण ध्वनियों का प्रयोग होता है. महाप्राण ध्वनियों का प्रयोग बिल्कुल नहीं के बराबर होता है. किन्तु क्रोध एवं भय की स्थिति में महाप्राण का प्रयोग करते हैं. जैसे – सेथा (सेता) थेरिम (तेरिम) अर्थात कुत्ते को पत्थर मारना. ष, श के उच्चारण ‘हो’ भाषा में नहीं मिलते हैं. केवल ‘स’ का प्रयोग करते हैं. इस प्रकार ऋ, त्र, ज्ञ के उच्चारण भी नहीं मिलते हैं.

हिन्दी की तरह हो में भी क्रिया की सकर्मता और अकर्मता क्रिया में बाँटा जा सकता है. ‘हो’ भाषा में एक ही क्रिया के लिए कई-कई शब्द भी होते हैं. उसकी विविध क्रियाओं के लिए अनेक शब्द होते हैं. जैसे उदाहरण के लिए: ‌‍
काटना के लिए कई शब्द हैं –

कुल्हाड़ी से (शाखा/डाल) काटना – मअ्
मांस काटना – गेड्
बाल काटना/कैंची से कपड़ा काटना – रचम्
(धान) हँसुआ से काटना – इर
छुरी या बैठी से काटना – हड्
दो हिस्सों में काटना – कन्डि – बन्डि-इ
टुकड़ा-टुकड़ा करना – बेतेए – बेतेए / समअ्

खोलना के लिए भी उसी प्रकार से कई शब्द हैं –

बल्ब / (बोतल का) ढक्कन खोलना – तु~ड्
रस्सी खोलना – रऊ
दरवाजा खोलना – नी~इ

इस प्रकार ‘हो’ एक अत्यंत समृद्ध भाषा है.

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